इस्लाम के हिसाब से गुसल (नहाने) का सही तरीका

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gusal ka shi tareeka

इस पोस्ट को करने की खास वजह ये है के हमारे बहुत से भाई-बहनो को ये मालूम ही नहीं है की ना-पाक कब हो जाते है और पाक कैसे होते हैं. मतलब ग़ुस्ल क्या होता है, कब, कैसे और क्यों करते हैं

अगर आम नहाने की बात करे तो जिसको जब नहाना हो वो तब नाहा ले. जैसे नहाना हो वैसे नाहा ले, लेकिन ना-पाक होने के बाद जब तक ख़ास तरीके से नहीं नहाएगा तब तक पाक नहीं होगा, अगर ना-पाक इंसान पूरे समंदर के पानी से भी नाहा ले, लेकिन ख़ास तरीके से नहीं नहाए तो भी वो पाक नहीं होगा. इसलिए ये समझना ज़रूरी है के ख़ास तरीके से नहाना (ग़ुस्ल) कैसे करते हैं, कब करते हैं और क्यों करते हैं.

ना-पाक कब हो जाते हैं –

जब सीमेन/वीर्य/मणि किसी वजह से बहार आ जाता है, वो चाहे सेक्स के बाद हो या रात को (नींद) में निघतफल हो, या हाथ से निकल दिया हो, या मूवी देख कर या सेक्सी बाते करने के बाद ऐसा हो गया हो.
मतलब ये के वजह कुछ भी जब सीमेन/वीर्य/मणि निकल जाता है तो लड़का/लड़की ना-पाक हो जाता है, इसके बाद लड़का/लड़की को ख़ास तरीके से नहाना (ग़ुस्ल) ज़रूरी है, लड़की अगर पीरियड से हो गई तो भी वो ना-पाक हो गई, अब पीरियड का टाइम पूरा होने के बाद उसको ग़ुस्ल करना होगा, तभी वो पाक होगी.

ना-पाक इंसान क्या नहीं कर सकता-

ना-पाक इंसान नमाज़ और क़ुरान नहीं पढ़ सकता. क़ुरान को हाथ लगा सकता. इसके अलावा पाकि को आधा ईमान कहा गया है, इसलिए एक मुस्लिम को चाहिए के वो बिना किसी जायज़ वजह के ज़्यादा देर तक ना-पाक ना रहे और जल्दी से जल्दी ग़ुस्ल कर ले. ना-पाक इंसान को हवा/बाला/जिन्नात/भूत भी आसानी से लग सकते हैं, जबकि पाक इंसान को ये चीज़ भी काम ही नुकसान पहुँचती हैं. अगर बीवी पीरियड की वजह से ना-पाक है तो हस्बैंड को उसके साथ इंटरकोर्स नहीं करना चाहिए.

ना-पाक होने पर भी क्या काम कर सकते हैं-

ना-पाक होने के बाद भी नमाज़ नहीं पढ़ सकते, क़ुरान को नै पढ़ सकते, उसको हाथ नहीं लगा सकते, क़ुरान की कोई आयात नहीं पढ़ सकते (दुआ अगर क़ुरान की है तो पढ़ सकते हैं), बाकी सारे काम कर सकते हैं, खाना खा सकते हैं, ये बात ख़ास औरत के लिए है के पीरियड से होने के बाद भी वो खाना बना सकती है, मटके से पानी पि सकती है, साथ बैठ कर खाना का सकती है, एक ही बिस्तर पर शोहर बीवी सो सकते हैं, गले लग सकते हैं, किश कर सकते हैं, लेकिन इंटरकोर्स नहीं कर सकते. (वैसे पीरियड के टाइम गले लग्न, किश करना भी ना करो तो बेहतर है, खुद पर काबू हो तो ही करिये)

ग़ुस्ल (नहाने) का तरीका.
नहाने से पहले दिल में इरादा करो के में पाक होने और ना-पाकि को दूर करने के लिए नाहा रहा हु, सिर्फ दिल में इरादा करना काफी है, मुँह से नहीं बोलना है, घुसल का तरीका ये है के सबसे पहले अपने हाथो को धो लो, फिर अपने पर्सनल पार्ट को जहा गन्दगी लग गई है उसको अच्छे से धो लो, अब साबुन से हाथ धोने के बाद, वुज़ू करो, वुज़ू का तरीका ये है के पहले 3 बार दोनों हाथ के पंजे धो लो, फिर 3 बार कुल्ला कर लो, (घुसल कर रहे हो तो गरारा भी कर लो), फिर 3 बार नाक के दोनों नथनों में पानी चढ़ाओ (पहले सीधे तरफ के नथने में फिर उल्टे तरफ के नथने में), फिर हाथ की छोटी ऊँगली से नाक के अंदर की गन्दगी साफ़ कर दो, अब 3 बार पूरा मुँह धो लो, मुँह को माथे से लेखिन थोड़ी तक और एक कान से दोनों कान तक धो लो, अब दोनों हाथ को कोहनी तक 3 बार धो लो (पहले सीधे हाथ धो, फिर उल्टे हाथ), फिर दोनों हाथ में थोड़ा सा पानी लेकर सर की बालो पर हाथ फेर लो, एक बार हाथ माथे से लेकर कनपटी तक ले जाओ, फिर कनपटी से वापस माथे की तरफ ले आओ, फिर गर्दन की पीछे की तरफ उलटे हाथ फेरो, फिर दोनों की हाथ की छोटी ऊँगली दोनों कानो में घुमा लो, अब दोनों पैर धो लो (तखनो तक), पहले सीधे पैर धो, फिर उल्टे पैर धो, पैर को धोने में उल्टे हाथ का इस्तेमाल करो, इस तरह आपका वुज़ू हो गया, वुज़ू करने में ये ध्यान रखो की बदन अच्छे से गीला हो जाए और कोई जगह सुखी ना रहे, लेकिन इस चक्कर में ज़्यादा पानी नहीं बहाना है,

अब जब वुज़ू हो गया तो पहले सीधे काँधे पर 3 बार पानी डालो, फिर उल्टे काँधे पर 3 बार पानी डालो, फिर सर पर 3 बार पानी डालो, अब पूरे बदन पर पानी डालो, पानी डालने की बाद पूरे बदन को हाथो से रगड़ो (ज़्यादा ज़ोर से नहीं), रगड़ते इसलिए हैं की पूरे बदन पर पानी चला जाए, थोड़ी भी जगह सुखी ना रहे, अगर साबुन लगा कर नाहा रहे हो तो फिर साबुन लगाने में ही पूरे बदन तक पानी पहुंच जाता है इसलिए अलग से रगड़ने की ज़रूरत नहीं, अब पेट की नाफ (नाभि) में थोड़ा पानी डालो और ऊँगली दाल कर घुमाओ, ताके नाभि की अंदर भी पानी चला जाए, फिर पीछे दोनों कूल्हे (पुट्ठे) की बीच में पान डालो और हाथ से रगड़ो ताके दोनों कूल्हों की बीच भी पानी चला जाए, अब लैट्रिन ki जगह भी धो लो. इस तरह अब आपके पूरे बदन पर पानी चला गया और आपका घुसल हो गया,
अब आप नमाज़ पढ़ सकते हो, रोज़ा रख सकते हो, क़ुरान पढ़ सकते हो, क़ुरान को हाथ लगा सकते हो. ऊपर जो घुसल की लिए वुज़ू का तरीका बताया है, बगैर घुसल किये भी वुज़ू का तरीका वही है.

इन सबके अलावा – इनसान को अपने बगल और पेशाब की जगह की बालो को भी साफ़ कर लेनाचाहिए, क्योंकि इन बालो को भी इस्लाम में ख़राब मन गया है, ये बाल हर हफ्ते काट लो तो बेहतर है, अगर हर हफ्ते ना साफ़ कर सको तो काम से काम 40 दिन की अंदर तो साफ़ कर ही लेना चाहिए, हाथ पैर की नाख़ून भी ज़्यादा नहीं बढ़ना चाहिये, वो भी 8-10 दिन की अंदर अंदर काट लेना बेथर है, अगर कोई मूछ रखता हो तो उसकी मूछ की बाल भी इतने बड़े ना हो की पानी पीने या खाना खाने में उसके अंदर लगे, इसलिए मूछ की बाल भी छोटे रखना चाहिए. इस्लाम में हुक्म हैके दाढ़ी को बढ़ाओ और मूछ को काटो.

कुछ लोगो को ये लग सकता है की इस तरह की पोस्ट करने की ज़रूरत क्या है, तो उन लोगो से बस हमारा ये कहना है की हम ये पेज चला रहे हैं, और हमको मालुम है की कितने ज़्यादा लोग इस बारे में हमसे सवाल करते हैं, इससे पता ये चलता है की बहुत से लोगो को इस बारे में जानकारी बहुत काम है, कुछ तो सीखना ही नहीं चाहते, और कुछ शर्म की वजह से नहीं पूछ पाते, इसलिए ये पोस्ट ख़ास इस तरह की लोगो की लिए है, जिनको मालुम नहीं

 

 

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