UMAR SERIES l ABU BAKR (THE FIRST KHALIFA) l EP-17 l HINDI/URDU

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(i)हज़रत अबू बक्र (रजि अन्हा) –अस-सिद्दीक़

8 जून, 632-अगस्त 23, 634 ए डी)

573 इ में पैदा हुए हज़रत अबू बक्र (रजि अन्हा) पैगम्बर ﷺ से लगभग 2 साल छोटे हैं, हज़रत अबू बक्र (रजि अन्हा) मक्का में कुरैशी कबाइल के बनू तमीम के एक अजीम खानदान से थे। आपका असल नाम अब्दुल्ला इब्न अबू कुहाफ़ा था। उन्होंने कारोबार को एक पेशे के रूप में शुरू किया और कुछ तिजारती कारोबार रसूलुल्लाहﷺ की सोहबत में साथ किया। आप हज़रत मुहम्मदﷺ के सबसे करीबी साथी थे और आप सच्चाई, ईमानदारी और रहमदिली की मिसाल रहे है।

“ओह अबू बक्र! तुम जन्नत के तालाब पर मेरे साथी बनोगे क्योंकि तुम गुफा में भी मेरे साथी थे। ”(तिरमिधि शरीफ)

हज़रत अबू बक्र (रजि अन्हा) पहले शख्स थे जिन्होंने सबसे पहले इस्लाम अपनाया और आपको अल्लाह के पैगंबरﷺ से “अस-सिद्दीक” (हमेशा सच कहने वाला और यकीन करने वाला) का खिताब हासिल किया, आपने अपनी पूरी ज़िन्दगी इस्लाम की सच्ची खिदमत में गुज़र दी और अपने पास जितनी भी मालो दौलत थी उसे कमजोर गुलामो को उनके जालिम मालिकों से आजाद करने में खर्च कर डाली। जिनमें से रसूलुल्लाह के सबसे करीबी साथियों में से एक सहाबा और मुअज्जिन (मस्जिद में अजान देने वाला) हज़रत बिलाल (रजि अन्हा) थे।

“अबू-बक्र ने अपनी जायदाद और मिलकियत और सोहबत के साथ मेरी बहुत हिमायत की है। अगर मुझे उम्मत से खलील दोस्त को (मददगार दोस्त) लेना होता तो मैं अबू बक्र को ज़रूर ले जाता। ”(बुखारी)

सिद्दीक ए अकबर (रजि अन्हा) को अपनी बेटी हज़रत आयशा (रजि अन्हा) का पैगंबरﷺ से निकाह करने का ऐजाज हासिल हुआ, जो हज़रत खदीजा (रजि अन्हा) के बाद रसूलﷺ की सबसे पसंदीदा बीवी बनीं। अबू बक्र (रजि अन्हा) ने अल्लाह के रसूलﷺ के साथ लगभग सभी ग़ज़वातों में लड़ाई भी की। इस्लाम के पहले खलीफा के तौर पर आपने बिखरे हुए मुसलमानो को इस्लाम के झंडे तले एक जमात बनाया और आपने ही क़ुरआने पाक को जो उस वक़्त सिर्फ सहाबाओ के सीनो में महफूज़ था इकठ्ठा करवाकर एक पाक अल्लाह की किताब की शक्ल मैं पिरोया, आपकी खिलाफत का समय बहुत कम था, यानी केवल 27 महीने। हज़रत अबू बक्र (रजि अन्हा) की वफ़ात बरोज पीर, 23 अगस्त, 634 इ को हुई और आपको जन्नतुल बगी में रसूलुल्लाहﷺ के बगल में दफ़नाया गया।

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