UMAR SERIES l BATTLE OF UHUD & KHANDAQ l EP-12 l PART-02 l HINDI/URDU

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ओहद की घमासान लड़ाई में मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम के प्यारे चचा जान हजरत हमज़ा (रदीयल्लाहु अन्हु) किसी शेर
की तरह आगे बढ़ते जा रहे थे। जिधर उनके कदम बढ़े जाते दुश्मन दायें-बाएं ऐसे फट जाते जैसे कोई तेज़ लहर की मार से काई फटती चली जाती है। आज हजरते हमज़ा रदीयल्लाहू अन्हु हर खतरे से बेख़ौफ़ हो कर लड़ रहे थे। सामने से उनको शिकस्त देना कोई आसान काम नहीं था- उधर हिंदा ने वाहशी को यकीन दिलाते हुए कहा था “मैं तुम्हें इतना इनाम दुगी की तुम सोच भी नहीं सकते” अबू सुफियान की बीवी हिंदा की सबसे बड़ी तमन्ना थी ये- “ऐ मेरे खुदा हुबुल——(हिंदा ने अपने खुदा के आगे झुकते हुए कसम खायी)—“मैं वादा करती हूँ की अगर हमज़ा शहीद हो गए तो मैं उनका हार बना कर पहनूंगी, मैं उनका कलेजा चबा कर अपने दिल को ठंडा करुगी।”और ऐसा ही हुआ वाहशी ने अपनी बरछी फेंक कर उनकी नाफ़ (नाभि) पर मारा। हजरते हमज़ा रदीयल्लाहू अन्हु वही मैदान में गिर गए। एक ज़ख़्मी शेर की तरह उन्होंने पलट कर देखा- वाहशी अपनी कामयाबी पर मुस्कुरा रहा था। हमज़ा उठ भी न सके और धीरे-धीरे उनकी आँखे बंद हो गयी।